Wednesday, 21 November 2018

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      औपचारिक पत्र 
       [Formal Letter]

आज के आधुनिक युग में टेक्नोलॉजी का बढ़ता प्रभाव देखकर आप अत्यंत चिंतित हैं | अपने क्षेत्र के समाचारपत्र 'आज की आवाज़' के मुख्य सम्पादक को पत्र लिखकर इस समस्या की गंभीरता से अवगत करवाएँ साथ ही इस समस्या से बचने के कुछ उपाय भी सुझाएँ  |  


सी - 74/ एस - 4, 
धारी अपार्टमेंट, 
शालीमार गार्डन, गाज़ियाबाद (उ.प्र)

16 नवंबर, 2018 

मुख्य संपादक,
आज की आवाज़(दैनिक पत्र),
शालीमार गार्डन,गाज़ियाबाद (उ.प्र)


               विषय : टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग के कारण भविष्य पर मंडराता खतरा 

महोदय, 
निवेदन यह है कि मेरा नाम स्पर्श कटारिया है और मैं आपके समाचारपत्र का नियमित पाठक हूँ | आपके समाचार पत्र की खासियत ये रही है कि उसमें अन्य समाचारपत्रों की तरह सिर्फ चोरी-डकैती, लूट-मार या घपलों की ख़बरें न हो कर समाज को जागरुक बनाने की कोशिश की जाती है | यही कारण है कि हमारे क्षेत्र के अधिकतर लोग इस समाचारपत्र को पढ़ते हैं | अभी हाल ही में मैंने महसूस किया कि आज की युवा पीढ़ी टेक्नोलॉजी के नाम पर अनेक यंत्रों का उपयोग करते हुए समय की बर्बादी में लगी है | आपके प्रतिष्ठित समाचारपत्र के माध्यम से मैं अपने देश के युवाओं को इस समस्या के प्रति सचेत करना चाहता हूँ | 

मान्यवर, दरअसल पिछले सप्ताह मैं अपने कॉलेज के छात्रों के साथ शैक्षणिक भ्रमण के लिया कश्मीर गया था|  | अपनी यात्रा के दौरान मैंने पाया कि प्रत्येक छात्र के पास मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप तथा एक से बढ़कर एक कैमरे थे | सब के सब अपने यंत्रों में व्यस्त थे | कोई भी छात्र कश्मीर की सुंदरता का आनंद नहीं ले पा रहा था |  दिखने में यह बात इतनी गंभीर नहीं है पर ये भविष्य में गंभीर रूप ले सकती है |

अक्सर देखा गया है कि ये लोग अपने फ़ोन पर सन्देश लिखते हुए या गाने सुनते हुए सड़क ऐसे पार करते हैं जैसे किसी बाग़ में टहल रहे हों | ऐसे में वे खुद को कितने बड़े खतरे में डाल रहे हैं, इसका इन्हें ज़रा-सा भी अनुमान नहीं है | अब यदि लैपटॉप की बात करें तो आज की शिक्षा प्रणाली को ध्यान में रखते हुए यह एक ज़रुरत बन गया है |  ज़्यादातर छात्रों  के पास लैपटॉप होता ही है, पर क्या वे इसका उपयोग पढ़ाई के लिए कर रहे हैं ? इसका जवाब है नहीं | आज लैपटॉप पर वीडियो चैट, ऑनलाइन खरीदी और न जाने कितनी  चीज़े की जा रही है पर जिस काम के लिए इसको खरीदा गया था, वो ही नहीं हो पा रहा है |

आज के युवाओं से मैं ये जानना चाहता हूँ कि क्या इन यंत्रों के मायाजाल से निकल पाना इतना मुश्किल है कि वे किसी घूमने की जगह, संगोष्ठी या पढ़ाई आदि को गंभीरता से नहीं ले पाते | मेरे विचार से हमें अपने जीवन का हर पल ऐसे जीना चाहिए कि हम उन पलों को भविष्य में याद करके खुश हो सकें और ये तभी संभव है जब हम अपने इन यंत्रों का सही उपयोग करें | आज का युवावर्ग काफी समझदार है इसलिए उसे खुद तय करना होगा कि ये यंत्र जो हमारी सुविधा के लिए हैं वे हमें किसी दुविधा में न दाल दे |


 धन्यवाद | 

भवदीय, 
स्पर्श कटारिया 



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Monday, 12 November 2018

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पत्र लेखन


यहाँ हम पत्र को दो भागों में बाँटते हैं - 

1 - औपचारिक पत्र       2 - अनौपचारिक पत्र 

औपचारिक पत्र [Formal  Letter ]- जैसा की नाम से ही समझ में आ रहा है कि जिन पत्रों को लिखते समय औपचारिकता निभाई जाए, उन्हें औपचारिक पत्र कहते हैं | 

जैसे - प्रधानाचार्य को पत्र  या किसी समाचार के सम्पादक [Editor] को पत्र | इन पत्रों में हम केवल काम की बात ही करते हैं, निजी सवाल नहीं करते | 

अनौपचारिक पत्र [ Informal  Letter ]- इन पत्रों में औपचारिकता नहीं निभाई जाती | जैसे हम अपने करीबी लोगों से बात करते हैं उनका हाल-चाल पूछते हैं वह सब हम अनौपचारिक पत्र में कर  सकते हैं | 

जैसे - अनौपचारिक पत्र हम अपने भाई-बहन, रिश्तेदारों और दोस्तों को लिखते हैं, जिसमे हम निजी [Personal] बातें  भी कर सकते हैं |



नोट - हिंदी प्रश्नपत्र- १ में कईं बार पत्र लेखन विधा पर प्रश्न पूछा जा चुका है, इसलिए इस विधा को अच्छी तरह से समझ लीजिये और पुराने प्रश्नपत्रों के प्रश्नों का अभ्यास कीजिये |  ये प्रश्न ५ या प्रश्न ६ दोनों में पूछा जा सकता है | 





 औपचारिक पत्र का प्रारूप 
[Format of Formal Letter] 


  1. पत्र लिखनेवाले का पता [Sender's Address] 
  2. दिनाँक [date]
  3. पत्र पाने वाले का पता [Receiver's Address]
  4. एक लाइन छोड़ें 
  5. विषय [Subject]
  6. सम्बोधन [महोदय, श्रीमान, मान्यवर आदि]
  7. पत्र का प्रथम चरण [Introduction]
  8. मध्य भाग [Main body]
  9. अंतिम भाग [Conclusion]
  10. धन्यवाद [Thanking you]
  11. स्वनिर्देश  [प्रार्थी, भवदीय आदि]
  12. नाम [पत्र लिखने वाले का नाम] 




 अनौपचारिक पत्र का प्रारूप 
[Format of Informal Letter] 


  1. पत्र लिखनेवाले का पता [Sender's Address] 
  2. दिनाँक [date]
  3. एक लाइन छोड़ें 
  4. सम्बोधन [प्रिय मित्र/ अनुज, आदरणीय दादा जी/ पिताजी आदि]
  5. अभिवादन [ शुभाशीष, नमस्कार, सादर चरणस्पर्श आदि]
  6. पत्र का प्रथम चरण [हाल-चाल पूछना]
  7. मध्य भाग [Main body]
  8. अंतिम भाग [सभी बड़े-छोटों को नमस्कार और प्यार देते हुए पत्र बंद करना |]
  9. अपना सम्बन्ध लिखना [तुम्हारा प्यारा मित्र, आपका पोता/बेटा]
  10. अपना नाम लिखना 



मुझे उम्मीद है कि  आप औपचारिक और अनौपचारिक पत्र के बीच का अंतर समझ गए होंगे | 
इस सम्बन्ध में कोई भी समस्या हो तो मुझे अवश्य लिखें |  अगले ब्लॉग में आपको इन पत्रों का एक नमूना दिया जायेगा ताकि आप उसे समझकर अपनी नोटबुक में लिख लें और आगे कभी भी पत्र लिखते समय आपको कोई समस्या न आए | 



धन्यवाद,
कविता गांग्यान 

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अंतर्राष्ट्रीय विद्यालयों में हिंदी के प्रश्नपत्रों की जानकारी

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               अंतर्राष्ट्रीय विद्यालयों में हिंदी भाषा के दो प्रश्नपत्र होते हैं -


 प्रश्नपत्र -१ (पठन और लेखन कौशल पर आधारित )  - कुल अंक = 60 


 यह प्रश्नपत्र 60 अंक का होता है तथा इसमें 6 प्रश्न पूछे जाते हैं |
  • प्रश्न १ - अपठित गद्यांश पर आधारित होता है और यह 6 अंकों के लिए पूछा जाता है | 
  • प्रश्न २ - बहुवैकल्पिक प्रश्न होता है, इसमें भी एक गद्यांश को चार भागों [A,B,C और D] में बाँटा जाता है तथा एक पंक्ति देकर प्रश्न पूछा जाता है कि यह पंक्ति गद्यांश के किस भाग से ली गई है | यह प्रश्न 9 अंक का होता है | 
  • प्रश्न ३ - इस प्रश्न में फिर से अपठित गद्यांश दिया जाता है | अबकी बार प्रश्न  [note making] टिप्पणी पर आधारित होते हैं,  मतलब गद्यांश में से खास-खास बातों को हैडिंग की तरह लिख दिया जाता है और छात्र को उन हैडिंग्स को ध्यान में रखकर उस से जुडी जानकारी गद्यांश में से ढूंढकर लिखनी होती है |  यह प्रश्न भी 9 अंक के लिए पूछा जाता है | 
  • प्रश्न ४ - प्रश्न ३ के गद्यांश को पढ़कर उसका सारांश प्रश्न चार में लिखना होता है, जिसके लिए 10 अंक निर्धारित किये गए हैं | 
  • प्रश्न ५ - इस प्रश्न में लेखन कौशल की जाँच की जाती है अर्थात डायरी लेखन, ई.मेल लेखन, रिपोर्ट लेखन आदि पूछकर ये देखा जाता है कि छात्र अपनी बात को कितनी स्पष्टता से लिख कर समझाने में समर्थ है | इस प्रश्न के लिए 8 अंक मिलते हैं | 
  • प्रश्न ६- यह प्रश्नपत्र का अंतिम प्रश्न होता है, किन्तु सबसे अधिक महत्वपूर्ण भी होता है | अक्सर छात्र इस प्रश्न को ठीक से न समझने की गलती कर बैठते हैं | यह प्रश्न भी लेखन कौशल विधा जाँचने के लिए पूछा जाता है | इसमें पूछे जाने वाले प्रश्नों में पत्र लेखन, निबंध लेखन, वाद-विवाद लेखन, भाषण लेखन, साक्षात्कार लेखन आदि सम्मिलित हैं | यह प्रश्न 16 अंकों के लिए पूछा जाता है | 
प्रश्नपत्र -२  (श्रवण कौशल पर आधारित )  - कुल अंक = 30 
 यह प्रश्नपत्र 30 अंक का होता है तथा इसमें 4 प्रश्न पूछे जाते हैं |
  • प्रश्न १ - यह प्रश्न 6 अंकों के लिए पूछा जाता है | इसमें अलग-अलग संवाद [dialogues] सुनाकर उस से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं | 
  • प्रश्न २ - यह प्रश्न 8 अंकों के लिए पूछा जाता है | इसमें कोई जानकारी या बातचीत, औपचारिक बातचीत आदि सुनाकर रिक्त स्थानों को भरने का कार्य दिया जाता है | 
  • प्रश्न ३ - यह प्रश्न 8 अंकों के लिए पूछा जाता है | इसमें कोई साक्षात्कार, आत्मभाषण [monologue], वार्ता आदि सुनाई जाती है | फिर प्रश्न में से रेखांकित [underlined words/ phrase] शब्दों या वाक्यांश को हटाकर सही जानकारी लिखनी होती है | 
  • प्रश्न ४ - यह प्रश्न भी  8 अंकों के लिए पूछा जाता है |  इसमें दो लोगों के बीच होने वाली चर्चा को सुनकर छात्रों को बहुवैकल्पिक प्रश्नों के उत्तर   हैं |

इसके आलावा कथन कौशल के लिए भी एक प्रश्न पत्र होता हैं किन्तु वह अभी वैकल्पिक है, यदि छात्र और विद्यालय इस विकल्प को चुनते हैं तो ही उन्हें यह पेपर देना होता है | 

अगले ब्लॉग में इन सभी पर और अधिक जानकारी दी जाएगी | आपको ये जानकारी कैसी लगी मुझे ज़रूर बताएँ |  


धन्यवाद, 
कविता गांग्यान 





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